”क्या वाकई में ताज महल पांच वर्षो में ढह जाएगा?”

October 9, 2011 10:47 am0 commentsViews: 25

पूछा जाने लगा है कि ''क्या वाकई में ताज महल पांच वर्षो में ढह जाएगा?'' लेकिन समाचार पत्र में जिस भारतीय सांसद और इतिहासकार का जिक्र किया गया है, उन दोनों का कहना है कि यह झूठी चेतावनी है, यद्यपि सूख रही यमुना नदी को लेकर चिंताएं जरूर हैं।

इस सप्ताह के प्रारम्भ में समाचार पत्र 'डेली मेल' में प्रकाशित रपट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय सांसद रामशंकर कथीरिया के हवाले से कहा गया है कि 17वीं सदी की इस विश्व प्रसिद्ध इमारत की बुनियाद क्षतिग्रस्त हो गई है और नीव में इस्तेमाल की गई लकड़ियां सड़ गई हैं।

रपट में कथीरिया के हवाले से कहा गया है, ''ताज पांच सालों में ढह सकता है।'' रपट में प्रमुख मुगल इतिहासकार आर. नाथ के बयान भी शामिल हैं।

इस चेतावनी के बाद ताज महल की देखरेख करने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने यमुना नदी से लगे ताज महल के पिछले हिस्से का मुआयना किया।

एएसआई के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, ''हमें किसी दरार या खिंचाव का कोई निशान नहीं मिला है।''

कथीरिया ने हालांकि कहा कि उन्होंने केवल अपनी चिंता और आशंका जाहिर की थी, क्योंकि नदी में पानी नहीं रह गया है, जो कि इस संरचना की अच्छी सेहत के लिए जरूरी है।

कथीरिया ने कहा, ''मैंने कोई समयसीमा नहीं दी है और किसी व्यक्ति ने मुझसे फोन पर पूछा, तो मैंने अपने विचार व्यक्त कर दिए थे।'' उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी तरह यह भी नहीं पता कि उन्होंने किसी विदेशी मीडिया से बात की थी।

नाथ ने कई अवसरों पर और मुगल वास्तु पर अपनी कई पुस्तकों में ताज महल के पीछे यमुना के पूर्ण बहाव के महत्व की व्याख्या की है। लेकिन वह भी किसी समय सीमा को लेकर स्पष्ट नहीं हैं।

नाथ ने कहा, ''एक निराधार आशंका पैदा की जा रही है। ताज महल के भारी वजन के संतुलन के लिए यमुना में पानी आवश्यक है। नींव में इस्तेमाल की गई लकड़ी को पानी में डूबा रहना चाहिए या नहीं, इस बारे में टिप्पणी नहीं की जा सकती। इस बारे में विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों को जांच करनी चाहिए।''

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